फ़ज़्ले रब (In Grace)
मुसाफ़िर नहीं, मुसलसल राही हूँ।
लिखें वो मेरे रास्तें
उस खुदा के कलम की स्याही हूँ।
अस्बाब मेरे हैं, जहाँ उसका
मुन्तज़िर नहीं, उसकी फ़ज़ीलत की आगाही हूँ।
ज़हमतें क्यूँ गिनूँ जब शुक्राने हैं बेशुमार
ज़िन्दगी का हर पल हैं फ़ज़्ले रब
बस इस इज़्हार-ए-बयान की गवाही हूँ।
[मुसलसल = perpetual , अस्बाब = agency, मुन्तज़िर = one who waits, फ़ज़ीलत = virtue, आगाही = awareness, ज़हमतें = hardships, फ़ज़्ले रब = bounty of God]
सब्र (Patience)
रखना मत आरज़ू हवाओं के रफ़्तारों का
न महक गुलों का न चमक हज़ारों तारों का।
आरज़ी है सूरत धूप, ख़िज़ा और अब्र की।
अगर करनी हो ख़्वाहिश तो करना
आसमानों के सब्र की।
[आरज़ी = temporary, ख़िज़ा = autumn, अब्र = clouds, सब्र = patience]
नज़रिये (Perspectives)
धूप भी यही थी उस दौर,
अब्र और साये भी यही |
आँखों के मनाज़िर वही हैं,
मन के मंज़र हो गए तब्दील ||
नज़ारे वही हैं अर्सों बाद भी,
नज़रिये पल-पल बदलते गए |
वक़्त की रफ़्तार अब भी यक्सन है,
हम तलाफ़ी खोजने थमते गए ||
[अब्र = clouds, मनाज़िर = scenes, मंज़र = landscape, तब्दील = changed, यक्सन = constant, तलाफ़ी = making up for loss]